Jai badri vishal .. **Shri Badrinath Temple Kapat Opening Date : 10th may 2019 at 4:15 am**

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बहूनि सन्ति तीर्थानि, दिवि भूमौ रसासु च।
बदरी सदृशं तीर्थ न भूतं न भविष्यति।।

हमारे शास्त्रों में अनेक तीर्थ हैं, किन्तु उन सब में चारो दिशाओं में चार मुख्य हैं। पूर्व दिशा में श्री जगन्नाथ जी, दक्षिण में श्री रामेश्वरनाथ जी, पश्चिम में श्री द्वारिकानाथ जी, और उत्तर में श्री श्री बद्रीनाथ जी
नर और नारायण पर्वतों की गोद में और नीलकंठ पर्वत  श्रृंखलाओं के सामने समुद्र तल से लगभग 3133 मीटर की ऊंचाई पर बसा मुक्तिप्रद परम महापावन तीर्थ श्री बद्रीनाथ धाम विद्यमान है ।
भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा चारों धाम में से एक के रूप में स्थापित किया गया था। 

किं किं न जायते तस्य मुक्तिस्तस्य करे स्थिता ।
धन्याः कलियुगे धोरे ये नरा बदरीं गताः ।।

नर-नारायण आश्रमः

विशाला बदरी यत्र नर-नारायणाश्रमः।
तं सदाध्युषितम यक्षौद्रक्ष्याक्यों गिरिमुत्तम्।।
(महाभारत वनपर्व- 141/23-25)

जो भारत का शिरोमुकुट है,उसी के एक उत्तुंग शिखर के प्रांगण में बदरिकाश्रम या बदरीवन है।  इन चर्म चक्षुओं से न दीखने वाला वह एक उसी तरह बदरी का विशाल वृक्ष है, जिस प्रकार प्रयाग में अक्षयवट है।  बदरी वृक्ष में लक्ष्मी का वास है।  उसकी सुखद शीतल छाया में भगवान् ऋषि मुनियों के साथ सदा तपस्या में निरत रहते हैं।  बदरी वृक्ष के कारण ही बदरी क्षेत्र कहलाता है और नर-नारायण का निवास स्थान होने से इसे नर-नारायण या नारायणाश्रम भी कहते हैं।

श्री बदरीनाथ (प्राचीन शिव भूमि)

श्री बद्रीनाथ जी के प्रधान सिंह द्वार से नीचे और तप्त कुण्ड के बायी ओर भगवान आदि केदारेश्वर का मंदिर है। बद्रिकाश्रम में आदि केदारनाथ का मंदिर होने की संबंध में पौराणिक कथा है, स्कंद पुराण की केदारखंड नामक भाग में बद्रिकाश्रम को शिवजी का प्राचीन निवास कहा गया है।

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