Badrinath Dham

 

देवप्रयाग

देवप्रयाग दो पवित्र नदियों, भागीरथी और अलकनंदा का संगम है। यह बद्रीनाथ के रास्ते पर पहला प्रयाग है। इस संगम के बाद, इसे गंगा नदी के रूप में जाना जाता है। देवप्रयाग अर्थात ( दैवीय संगम )

image

देवप्रयाग

रूद्रप्रयाग

image

रूद्रप्रयाग

भगवान शिव के नाम पर रूद्रप्रयाग का नाम रखा गया है। रुद्रप्रयाग अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल है।यहां संगीत उस्‍ताद नारद मुनि ने भगवान शिव की उपासना की थी और नारद जी को आर्शीवाद देने के लिए ही भगवान शिव ने रौद्र रूप में अवतार लिया था।

कर्णप्रयाग

अलकनंदा तथा पिण्डर नदियों के संगम पर कर्णप्रयाग स्थित है। पिण्डर का एक नाम कर्ण गंगा भी है, जिसके कारण ही इस तीर्थ संगम का नाम कर्ण प्रयाग पडा। यहां पर उमा मंदिर और कर्ण मंदिर दर्शनीय है। पौराणिक रूप से कर्णप्रयाग की संबद्धता उमा देवी (पार्वती) से भी है। उन्हें समर्पित कर्णप्रयाग के मंदिर की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य द्वारा पहले हो चुकी थी।

image

कर्णप्रयाग

नंदप्रयाग

image

नंदप्रयाग

नंदप्रयाग संगम जहां नंदाकिनी नदी अलकनंदा में मिलती है। एक कथा के अनुसार, एक महान राजा नंदा ने यज्ञ प्रदर्शन किया और भगवान का आशीर्वाद मांगा। इसलिए, संगम उसके नाम पर है।

विष्णुप्रयाग

विष्णुप्रयाग अलकनंदा नदी के पंच प्रयाग (पांच संगम) में से एक है, और उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी और धौलीगंगा नदी के संगम पर स्थित है।हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, यह वह जगह है जहां नारद जी ने तप किया, जिसके बाद विष्णु जी ने उन्हे दर्शन दिये।

image

विष्णुप्रयाग