Badrinath Dham

 

बदरिकाश्रम ( आध्यात्मिक केन्द्र )


 

हिम शब्द का अर्थ बर्फ और आलय शब्द का अर्थ वास है। लेकिन हिमालय के शक्तिशाली पर्वत श्रृंखलाओं की तुलना बर्फ के निवास से कही अधिक है। हिमालय संसार की छत के समान है, इनकी विशालता एवं इसकी शुद्धता हमें आच्छादित करती है और विनम्रता के साथ मनुष्यों को सही दृष्टीकोणो से परिचित कराती है। संसार के इस उच्चतम पर्वतों में से 8 पर्वतों का घर हिमालय है, जिसमें कि माउन्ट एवरेस्ट उच्चतम है। हिमालय दुनिया भर में प्रतिष्ठित है।

प्राचीन पहाड़ देवताओं का निवास स्थान है और दुनिया का आध्यात्मिक केन्द्र माना जाता है। हिमालय की तलहटी में सैकड़ों मन्दिर एवं धार्मिक स्थल, यहाँ तक कि धुंध से घिरी हुयी बर्फ से ढकी हुयी पहाडिया अनेकों पौराणिक कथाओं और किवंदन्तीयो को जन्म देती है जो भारतीय संस्कृति और धर्म का आधार है।

प्राचीन समय से मान्यता है कि हिमालय अध्यात्मिकता प्राप्त करने का मुख्य द्वार है हजारों लोग यहाँ शान्ती की खोज में आते है, बहुत से लोगों ने यहा घने जंगलों एवं पवित्र नदियों के बहाव के साथ जो कि निचले हिमालय में अवस्थित है, में अपनी अर्न्तआत्मा की वास्तविकता को पहचाना।

हिमालय सभी प्राचीन नदियों का उदगम स्थल है एवं पवित्र गंगा भी यहीं से निकलती है इन नदियों के किनारे पर कई महान आध्यात्मिक आत्माओं ने जीवन एवं इसके सार तत्व को समझा और जाना।

हिन्दू धर्म के अनुसार हिमालय में भगवान शिव का वास है, यह भारत के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थलों का गृह है। जैसे कि कैलाश मानसरोवर, अमरनाथ और चार धाम आदि।

श्री बदरिकाश्रम भगवान विष्णु का सबसे प्रमुख अधिष्ठान है ।

अनादिकाल से भगवान नारायण यहाँ नर के साथ तपस्यारत हैं।

महाभारत में आया है कि वदर्याश्रम में देवगण निवास किया करते हैं और वहां महर्षिगण के भी बहुत आश्रम विद्यमान हैं। मार्कण्डये ऋषि की तपःस्थली और कर्मस्थली बदरिकाश्रम ही रही है। इसके अलावा शायद ही हिन्दू धर्म में वर्णित कोई ऋषि-मुनि ऐसे रहे हों जो भगवान नारायण के दर्शन करने न गये हों और जिन्होंने उनसे प्ररेणा न ली हो।

कृष्ण यहां सायंगृह-मुनि के रूप में नारायणपुरी में तपस्या करने आये, वहीं श्रीराम भी भगवान नारायण के दर्शन के लिए बदरिकाश्रम पहुंचे। आनन्द रामायण में श्री राम के सपरिवार, बदरिकाश्रम की यात्रा करने का वर्णन मिलता है।

गत्वा देवप्रयागंचालकनन्दातटेन वै।
नर-नारायणौ गत्वा दर्शनान्मुक्तिदौनृणाम्।।
बदरिकाश्रमे रामः केदारेशं विलोक्य सः।
महापथं ततो गत्वा ययौ तन्मानसं सरः।।

(आनन्द रामायण सर्ग- 9/4-6)

यही बात विष्णुपुराण में आयी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण उद्धव से कहते हैं कि-

गच्छ त्वं दिव्यया गत्या मत्प्रसादसमुत्थया।
यद्वदर्याश्रमं पुण्यं गन्धमादनपर्वते।।
नर-नारायणस्थाने तत्पवित्रं महीतले।

(विष्णुपुराण- 5/37/34)

बदरिकाश्रम, जो कि इसके आस्तित्व के समय से ही इसकी आध्यात्मिकता के लिये जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री राम ने स्वयं ब्रहमहत्या के पाप से मुक्त होने के लिये लम्बे समय तक यहां तप किया। इस स्थान की आध्यात्मिकता के कारण भारत के विभिन्न प्रान्तों एवं संसार से विभिन्न साधु सन्त आध्यात्मिकता की पराकाष्ठा प्राप्त करने के लिये तप हेतु यहाँ आते है।