Badrinath Dham

 
Narmada Bhavan

आचार्य भास्कर जोशी

image

श्रीमद् भागवत

Narmada Bhavan

जगमोहन शास्त्री कोटियाल

एक भागवनं शास्त्रं मुज्दिदानेन गर्जनि
’’श्रीमद् भागवत ग्रन्थोडयं वुधानाम् सुलभः परत्र च विवुधानामपि दुर्लभ’’
 

यह श्रीमद् भागवत जहाँ विद्वानों के लिये सुलभ (सरल) है वहीं दूसरी तरफ देवताओं के लिये दुर्लभ है।  श्रीमद् भागवत भगवान श्रीकृष्ण का बाड्मय अवतार है, भागवत स्वंय अपने में ही परब्रहम है यह स्वयं वासुदेव भगवान श्री कृष्ण का तेजो मय पुन्ज है।
प्रमाण दिया जा रहा है :- जब भगवान श्री कृष्ण अपने स्वधाम गोलोक को प्रस्थान करने की तय्यारी में थे, उसवक्त प्रभाष क्षेत्र में उन्हें मिलने उनके सखा व महारानी उन्हे मिलने के लिये आये और यह कहा कि गोविन्द आप तो भक्तों का कार्य करके वैकुण्ठ चले जाओगे, किन्तु आपके चले जाने पर घोर कलियुग आजायेगा, मूर्खों का राज्य होगा मुक्ति का मार्ग नहीं मिलेगा। लोग पापकर्मों में डूब जायेंगे।  इससे मुझे बहुत चिन्ता हो रही है ।

त्वं तु यास्यति गोविन्द भक्त कार्य विधाय च
मच्चित्ते महती चिन्ता तां श्रुत्वा सुख मा वह ।।

(पदमपुराणोउत्तराखण्डे श्रीमदभागवन महात्म 3/55) 

इस प्रकार उद्धव जी की बात सुनकर भगवान श्री कृष्ण ने विचार करके अपने स्वरूप को (स्वयं को) भागवान जी में समपर्तित कर दिया वे श्रीमद भागवत जी में स्वयं अन्तर धान हो गये 

स्वकीयं यद् भवेत् तेजस्तच्च भागवते दयार
सिरोधाय प्रविष्टोडयं श्रीमद भागवतार्पणम्।।

(श्रीमदभागवत महात्म 3/69)

इसी लिये श्रीमद भागवत को भगवान कृष्ण की बाड्मयी मूर्ति कहते हैं, इसका सेवन अवश्य करना चाहिए इसे सुनना चाहिए इसका पाठ नित्य करना चाहिए और अगर इतना भी न कर सकें, तो भि दर्शन करने मात्र से समस्त पाप नाष हो जाते है।

तेनेयं वाडृयी मूर्ति, प्रत्यक्षा वर्तते हरेः
सेवनात् श्रवणात् , पाठात् दर्शनात्पाप नाशनी।।

(पदमपुराण, श्रीमद भागवत महात्म 3/62)

जीव मात्र नित्य माया मोह से प्रेरित होकर क्षण प्रतिक्षण फालव्याल विष से जल कर मृत्यु की तरफ प्रेरित हो रहा है, किन्तु अगर भक्ति और ज्ञान से सम्पन्न जीवात्मा परमात्मा की और अग्रसर हो जाय, श्रीमद भागवत को मन से सुने और समझने की चेष्ठा करे, तो संसार गो के खुर के बरा बर उनके लिये हो जायेगा और जैसे बच्चे भूमि पर वने हुए गो खुर को बार बार लांघ जाते है, भागवत सुनने और समझने वालों के लिये पूरा संसार गो के खुर की तरह हो जायेगा और वे भवसागर पार करके, भगवान के लोक को प्राप्त हो जायेंगे।

श्रीमद भागवत कलियुग की मुक्ति का साघन है।

आचार्य भास्कर जोशी
देवप्रयाग/बदरीनाथ
गढ़वाल उत्तराखण्ड

जगमोहन शास्त्री कोटियाल
देवप्रयाग/बदरीनाथ
गढ़वाल उत्तराखण्ड

Pawan Mand Sugandh Sheetal Hem Mandir Shobhitam ,Neekat Ganga Bahut Nirmal ,Shri Badri Nath Vishwambharam ....