Badrinath Dham

 

चतुःस्त्रोत तीर्थ - चक्र तीर्थ- सत्यपद, सतपथ या सतोपंथ


चतुःस्त्रोत तीर्थ -

चतुःस्त्रोतमयं तीर्थ विलोचन मनोहरम्।
धर्मार्थकाममोक्षास्ते तिष्ठन्ति द्रवरूपिणः।।

इन चारों की स्थिति चारों दिशाओं में बताई गई है जहाँ नर नारायण पर्वत आपस में मिल गये हैं। जिसे स्वर्गारोहण कहते हैं।  उधर भी बहुत से स्त्रोत्र हैं।  बरफ के नीचे भी तो असंख्यों स्त्रोत वह रहे है। इन सब धाराओं को पार करने पर चक्र तीर्थ आता है।

चक्र तीर्थ -

सर्वसिद्धिमवाप्नोति मण्डलार्द्धेन भामिनि।
चक्रतीर्थे नरः स्नात्वा विष्णुलोकं व्रजेत्प्रिये।।

चक्रतीर्थस्य माहात्म्यादर्जुनः परमास्त्रवित्।
भूत्वा स नाशयामास शत्रून्दुर्योधनादिकान्।।

इसकी अर्धपरिक्रमा से (या मण्डलातीर्थ से) सम्पूर्ण सिद्धि की प्राप्ति होती है।  मनुष्य चक्रतीर्थ में स्नान करके विष्णुलोक को प्राप्त करता है। चक्र तीर्थ में स्नान करने के महात्म्य से ही अर्जुन ने अस्त्र-विद्या प्राप्त करके अपने शत्रु दुर्योधनादिकों को रण में परास्त किया था।  चक्र तीर्थ बहुत ही रम्य स्थान हैं  चक्र के आकार का चारों ओर तालाब की तरह मैदान है।  उसमें एक जल की धारा भी बह रही है।

चक्र तीर्थ

सत्यपद, सतपथ या सतोपंथ -

जो त्रिकोण-मंडित तीर्थ है, जिसका नाम सत्यपद तीर्थ है और जो सत्यपद को देने वाला भी है, जो अपने सब पापों से छूटने की इच्छा रखते हों उन्हें इस परम पावन पवित्रतमपाप नाशक तीर्थ को प्रयन्त के साथ देखना चाहिये।  लगभग 200 हाथ लम्बा यह सुन्दर स्वच्छ सरोवर होगा।  एकदम निर्मल जल है।  आस पास गुफायें बनी हैं उन्हीं में यात्री ठहरते हैं।

त्रिकोणमंडितं तीर्थ नाम्ना सत्यपदप्रदम्।
दर्शनीयं प्रयत्नेन सर्वैः पापमुमुक्षुभिः।।
(स्कन्द पु0)

स्कन्द पुराण में लिखा है, एकादशी के दिन यहाँ साक्षात विष्णु स्नान करने आते हैं और पीछे सब देवता ऋषि भी इसमें स्नान करते हैं।  तीनों कोनों पर तीनों देवता तप करते हैं।  इसके माहात्म्य के सम्बन्ध में यहाँ तक लिखा है कि यहाँ पर जो जप, तप, स्तुति पूजा, नमस्कार आदि पुण्य क्रिया की जाती है उसके फल को ब्रह्मा भी नहीं कह सकते।  फिर हम अल्पक्ष प्राणी इसके सम्बन्ध में और अधिक कह ही क्या सकते हैं।

जपं तपों हरिःक्षेत्र पूजां स्तुत्यभिवन्दनम्।
महात्म्यं कुर्वतां वक्तुं ब्रह्माणाऽपि न शक्यते।।

सतपथ

Pawan Mand Sugandh Sheetal Hem Mandir Shobhitam ,Neekat Ganga Bahut Nirmal ,Shri Badri Nath Vishwambharam ....