Badrinath Dham

 

खाख चौक

बहूनि सन्ति तीर्थानि, दिवि भूमौ रसासु च।
बदरी सदृशं तीर्थ न भूतं न भविष्यति।।

खाख चौक
{ प्राचीन हनुमान जी मन्दिर }

खाख चौक सिद्धपीठ ऋषिगंगा (पुष्पभद्रा) और अलकनन्दा के तट पर (पंचतीर्थों के प्रयाग - अग्निकुण्ड + कूर्मधारा + प्रहलाद धारा + ऋषिगंगा + अलकनन्दा) स्थित है।

यहाँ पर हनुमान जी का प्राचीन मन्दिर है, प्राचीन काल से ही ब्रदीनाथ धाम में प्रवेश करके सबसे पहले गरूड़ कुटी के दर्शन कर और इस प्राचीन हनुमान मन्दिर के दर्शन कर भक्तजन बद्री विशाल मन्दिर के दर्शन हेतु प्रस्थान करते थे क्योंकि यह प्राचीन रास्ता था।

(खाख चौक) पूर्वकाल से ही यह पवित्र स्थान साधू सन्तों और तपस्वियों की तपस्थली रहा है यहीं ऋषिगंगा के तट पर महर्षि मार्कण्डेय ने तप कर कई कल्पों की दीर्धायु प्राप्त की थीं  जनश्रुती है कि यहां पर समर्थगुरू राम दास जी ने भी 41 दिन रहकर हनुमान जी की अराधना कर अपना लक्ष्य प्राप्त किया।

इस पवित्र स्थान पर बहुत सारे तपस्वीयों ने तपस्या कर, अराधना  कर स्वजीवन व जनमानस के जीवन को भी लाभान्वित  किया है ।  यह वह पवित्र स्थान है जहां क्षण भर रहने से ही एक अलग सी प्रकार की अनूभूति होती है।

जनश्रुती है कि जितना प्राचीन बद्रीनाथ धाम है, उतना ही प्राचीन यह पवित्र स्थान भी है। 

खाख चौक वैष्णव आश्रम आज संत श्री बालक योगेश्वर दास जी महाराज के निरन्तर प्रयास और असीम कृपा से साधू सन्यासियों के लिये एक पवित्र स्थान बना है, जहां पर कि दूर दराज से आये साधू सन्तों के लिये प्रतिदिन भंडारा चलता रहता है, ताकि कोई भी साधू संत बद्रीनाथ धाम से भूखा न जा सके।

महाराज जी के इस असीम प्रयास से आज यहां पर सैकड़ो साधु सन्त भोजन प्रसाद के रूप में प्रतिदिन ग्रहण करते है और रहते भी है।

संत श्री बालक योगेश्वर दास महाराज जी के अनुसार यह स्थान हमेशा सन्त महात्माओं के लिये था, और रहेगा, जिससे कि वे बद्रीनाथ धाम रहकर अपनी अराधना कर सके और लक्ष्य प्राप्ती कर सके।

( अन्न क्षेत्र )
खाख चौक वैष्णव आश्रम प्राचीन हनुमान जी मन्दिर
बद्रीनाथ धाम
संत श्री बालक योगेश्वर दास महाराज जी

संत श्री बालक योगेश्वर दास महाराज जी