Badrinath Dham

 

लीला ढुंगी - नंदा देवी - उर्वशी माता मंदिर - चरण पादुका


लीला ढुंगी

image

यह वह पवित्र स्थान है - जब भगवान नारायण तप करने का निश्चय कर यहां आए तो उन्होंने देखा यहां पर शिवजी का आधिपत्य है, वे देवी पार्वती के साथ यहां निवास करते हैं, भगवान समझ गए कि शिवजी का निवास स्थल है और वे सरलता से यह स्थान नहीं देगे अतः उन्होंने युक्ति से काम लिया और बालक का रूप धारण करके भगवान शिव और मां पार्वती को लीला दिखाई थी ।

नंदा देवी मन्दिर

यह भगवान शिव की अर्धांगिनी  माँ पार्वती (नंदा) का प्राचीन मंदिर है प्रतिवर्ष भाद्रपद की अष्टमी से पूर्व यहां के स्थानीय निवासी जीन्हे फूलारी कहते हैं, अपनी फूल कण्डियां साथ लेकर मां नंदा को उनकी ससुराल(नीलकंठ पर्वत की तलहटी पर) से बुलाने जाते है

एक रात्रि वहां विश्राम कर सुबह वहां से ब्रहमकमल के पुष्पों से अपनी फूल कण्डियां  सजाकर देव पत्थर धार तक आते हैं। फिर गांव से नंदा देवी कुबेर ,घंटा कर्ण, कैलाश के पस्वा ढोल-नगाड़ों के साथ माँं नंदा का स्वागत करने देव पत्थर धार तक जाते हैं। व गीत जागरों के साथ चारों पस्वा माँ भगवती की डोली लेकर भाद्रपद शुक्ल पक्ष अष्टमी के दिन मंदिर में प्रवेश करते हैं। माँ नंदा फूलकण्डी में ब्रहमकमलो के बीच भंवरे के रूप में बैठकर आती है जो सिर्फ चारों पस्वो को दिखाई देती है नंदा देवी के मायके आने की खुशी में यहां नंदाष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है

नंदा देवी के साथ आये भगवान शिव के गण लाटू देवता का पूजन कर देवी के पुजारियों को प्रत्येक घर का प्रसाद खिलाया जाता है 2 दिन तक मायके में रहने के बाद माँ नंदा देवी को गीत जागरों के साथ उनकी ससुराल विदा कर दिया जाता है।


image

नंदा देवी मन्दिर

उर्वशी माता मंदिर

image

उर्वशी माता मंदिर

एक समय भगवान विष्णु ने नर और नारायण के रुप में अवतार लिया। नर और नारायण भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए केदारखंड में उस स्थान पर तपस्या करने लगे जहां पर आज ब्रदीनाथ धाम है। इनकी तपस्या से इंद्र परेशान होने लगे। इसलिए इंद्र ने अप्सराओं को नर और नारायण के पास तपस्या भंग करने के लिए भेजा। लेकिन नर और नारायण इनकी ओर आकर्षित नहीं हुए बल्कि नारायण ने इंद्र की अप्सराओं से भी सुंदर अपने उरू से उर्वशी को जन्म दिया।

चरण पादुका

चरण पादुका बद्रिकाश्रम क्षेत्र में एक सुंदर शिला है जिस पर भगवान विष्णु के पैरों के निशान कायम है। यह पवित्र स्थान बद्रीनाथ मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर नीलकंठ पर्वत की ओर है।

image

चरण पादुका