Badrinath Dham

 

सोमकुण्ड तीर्थ - सूर्यकुण्ड - विष्णुकुण्ड - अलका पुरी


सोमकुण्ड तीर्थ

 यहां पर चंद्रमा ने 88 हजार वर्षों तक अष्टाक्षरी मंत्र से जाप करके श्री नारायण से नक्षत्रों के राजा होने का वर मांगा था, भगवान ने प्रसन्न होकर उनकी मनोकामना पूर्ण कर दी। इस कुंड का जल चंद्रमा की तरह घटता बढ़ता रहता है। प्रतिपदा से थोड़ा थोड़ा जमा होता है और पूर्णिमा को पूर्ण हो जाता है।

ततस्तु विमल तीर्थ सोमकुण्डाभिघं परम।
तपश्चकारं भगवान् सोमो यत्र कलानिधिः।।
(स्क0 पु0 व0 70 अ0 11 श्लोक)

तब से चन्द्रमा ग्रह, नक्षत्र, तारा तथा औषधियों और ब्राह्मणों के राजा हुए।  उसी दिन से यह कुण्ड सोमकुण्ड के नाम से प्रसिद्ध हुआ।  जो इस सोमकुण्ड के दर्शन करते हैं, इसमें स्नान करते हैं, उनके सब पाप छूट जाते हैं।

कर्मणा मनसा वाचयत् कृतं पातकं नृभिः।
तत्सर्व क्षयमाप्नोति सोमकुंडे क्षणादिह।।


(कर्म से मन तथा वचन से जो मनुष्यों द्वारा पाप होते है वे सब पाप इस सोमकुण्ड के दर्शनमात्र से क्षण में नाश हो जाते हैं।)

सोमकुण्ड तीर्थ

सूर्यकुण्ड -

सूर्यकुण्ड छोटा सा कुण्ड है।  उसी में से एक स्त्रोत वह रहा है।  जल बड़ा स्वच्छ है।  यहां पर  नर नारायण पर्वत मिल जाते हैं और बीच में बर्फ से  भरा मैदान जो भी मनुष्य यहां पर पूजा अर्चना करते हैं और सूर्य नारायण का जाप करते हैं, उन्हें  सूर्य के समान तेज मिलने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

सूर्यकुण्ड

विष्णुकुण्ड -

सूर्य कुंड से ठीक आगे की ओर विष्णु कुंड है, मनुष्य विष्णुकुण्ड मे स्नान करके विष्णुसायुज्य मोक्ष प्राप्त करता है। वहाँ सारस्वत कुण्ड में स्नान करने से पापक्षय होता है और विष्णु की प्रदक्षिणा करने से अश्वमेध का फल मिलता है।

अलका पुरी -

विष्णुपदी विष्णुपदात्पतिता मेरौ चतुर्धा चास्मात्।
विष्कम्भाचलमस्तकसत्तसरः संगता गता विगता।।
सीताख्या भद्राश्वं सालकनन्दा च भारतं वर्षम्।
(सिद्धान्तशिरोमणौ)

एक बहुत ऊँची पहाडी चोटी का नाम अलकापुरी है।  कहते हैं यहाँ अदृष्य रूप से यक्ष गन्धर्व रहते हैं। यहाँ से एक बड़ी वेगवती तीक्षण धारा निकलती है, इसे ही अलकनन्दा का मूल स्थान और स्त्रोत कहते हैं।

अलका पुरी

Pawan Mand Sugandh Sheetal Hem Mandir Shobhitam ,Neekat Ganga Bahut Nirmal ,Shri Badri Nath Vishwambharam ....