Badrinath Dham

 

व्यास गुफा - गणेश गुफा - मुचुकुन्द गुफा


व्यास गुफा

अलकनन्दा नदी के बायें भाग में सतोपन्थ-वसुधारा मार्ग माणा गांव से मिला हुआ है।  यहां एक विशाल चटॅटान में बनी गुफा ही, भगवान वेद व्यास की गुफा है।  इसी गुफा से पहाड़ के छोर पर सरस्वती नदी बहती है।  इसी गुफा में ध्यानमग्न होकर वेदव्यास जी ने गणेश जी से 18 पुराणों को लिखवाया है।

महाभारत, श्रीमद भगवत आदि ग्रन्थों से ज्ञात होता है कि पितामह ब्रह्मा जी की आज्ञा से पराशर पुत्र वेद-व्यास ने वैदिक संहिताओं को अनेक खण्डों में विभाजित किया और विविध विषयक मन्त्रों को पृथक-पृथक करके प्रत्येक विषय को क्रमबद्ध किया।  वेदानों का विभाजन करने के कारण ही इन्हें कृष्ण द्वैपायन व्यास कहा जाने लगा।  इस प्रकार वेदव्यास ने वेदों के अध्ययन को अति सरल बना दिया।  व्यास ऋषि की पवित्र गुफा बदरीनाथ में सिथत है, इस समबन्ध में केदारखण्ड एवं महाभारत में उल्लेख आया है कि हिमालय की पवित्र तलहटी में, पर्वतीय गुफा के भीतर धर्मात्मा व्यास जी स्नानादि से शुद्ध होकर पवित्र हो -कुश का आसन बिछा कर बैठे थे।

व्यासगुफा माणा ग्राम के ऊपर दो सौ मीटर की दूरी पर एक विशाल पत्थर के नीचे है।  इसी गुफा में रह कर व्यास जी ने भारत-संहिता (महाभारत) श्रीमद्भगवत आदि अष्टादश पुराणों की रचना की थी।  गुफा का आकार भी पुस्तक के पन्नों की तरह लगता है।  व्यास जी ने इसी गुफा पर अपने शिष्यों को वेदाध्ययन करवाया था।


image

व्यास गुफा

गणेश गुफा

माता पावर्ती और भगवान शिव के पुत्र गणेश जी मंगलकर्ता और ज्ञान एवं बुद्घि के देवता माने जाते हैं। इसलिए जब भी कोई नया काम शुरू किया जाता है तो सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है।

image

गणेश गुफा

वेदव्यास जी ने जब महाभारत महाकाव्य की रचना शुरू की तब उन्होंने न सिर्फ गणेश जी का स्मरण किया बल्कि गणेश जी को इस बात के लिए भी तैयार कर लिया आप महाभारत खुद अपने हाथ से लिखें।

गणेश जी ने पूरी महाभारत कथा एक छोटी सी गुफा में बैठकर लिखी। जहां यह कथा लिखी गई थी वह आज भी अलकनंदा और सरस्वती नदी के संगम तट पर मौजूद है। इस गुफा के पास में ही एक और गुफा है जिसे व्यास गुफा कहते हैं।

मुचुकुन्द गुफा

जिस तरफ व्यास गुफा है, उस पहाड़ की चोटी पर बहुत ऊँचायी पर मुचुकुन्द गुफा है।  जब कालिय यवन को मुचुकुन्द की दृष्टि से भस्म कराके भगवान कृष्णचन्द्र जी महाराज मुचुकुन्द के सामने प्रकट हुए तब मुचुकुन्द ने उनकी स्तुति की।  भगवान ने कहा अब तुम जाकर तप करो, तुमने बहुत शिकार आदि खेल कर हिंसा की है, अगले जन्म में तुम ब्राह्मण होगे, तब तुम्हारी मोक्ष होगी।  यह सुनकर भगवान की प्रदक्षिणा करके मुचुकुन्द श्री बदरिकाश्रम की ओर चले आये।  और उन्होंने आकर यहीं पर तप किया था।

बदर्याश्रममासाद्य नर - नारायणालयम्।
सर्वद्वद्वसह शान्तस्तपसाराधयद्धरिम्।।
(भा0 10 स्क0 53 अ0 4 श्लो0)

बड़ी भारी गुफा है।  बहुत नीचे है।  टूटे फूटे पत्थर खण्ड बहुत भरे हैं।  भीतर वर्षा का जल भी भर जाता है। आवणी जन्माष्टमी पर बहुत लोग दर्शन करने यहाँ आते हैं।

image

मुचुकुन्द गुफा